इस कदर खुद से नज़रे चुराते है हम
खुद को आईने में देखने से कतराते है हम
हर पल महसूस कराता है खामिया मेरी
हर लफ्ज़ को सुनने से घबराते है हम
इस तरह मायूस हो गई आरज़ू मेरी
खुली आँखों से खाव्ब सजाते है हम
उम्र भर रहा दोस्तों का हजूम मेरे साथ
और अब तन्हाई में सदा खुद को पाते है हम
गलती इतनी की रख सके न राज़ कोई, मेरी
देखना है कितने सवाल खुद से पूछ पाते है हम
और डालो न शराब इस पैमाने में
के अब बूंदों से चालक जाते है हम
ढूंढता रहा हिज्र की वजह उनसे
दर्द इसका और प्रखर पाते है हम
कभी तो आएगी वो शाम जो पूनम होगी
इस तरह खुद को आजमाते है हम।
@silence must be heard
खुद को आईने में देखने से कतराते है हम
हर पल महसूस कराता है खामिया मेरी
हर लफ्ज़ को सुनने से घबराते है हम
इस तरह मायूस हो गई आरज़ू मेरी
खुली आँखों से खाव्ब सजाते है हम
उम्र भर रहा दोस्तों का हजूम मेरे साथ
और अब तन्हाई में सदा खुद को पाते है हम
गलती इतनी की रख सके न राज़ कोई, मेरी
देखना है कितने सवाल खुद से पूछ पाते है हम
और डालो न शराब इस पैमाने में
के अब बूंदों से चालक जाते है हम
ढूंढता रहा हिज्र की वजह उनसे
दर्द इसका और प्रखर पाते है हम
कभी तो आएगी वो शाम जो पूनम होगी
इस तरह खुद को आजमाते है हम।
@silence must be heard
Nice one dude...
ReplyDeleteThank you Sahil
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