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Saturday, July 28, 2012

तेरे अधरों पर आधारित कविता तुझे सुनाता हूँ

तेरी  कोमल कोपल पे में किलकित हो जाता हूँ
तेरे अधरों पर आधारित कविता तुझे सुनाता हूँ 

बहते नभ से पूछा मैने 
किस दिशा करू में पूर्ण वहन 
जिस और महकता आँचल  तेरा
वो दिशा उसे बतलाता हूँ 

तेरे अधरों पर आधारित कविता तुझे सुनाता हूँ 

हर व्यथा मेरी जब बढ़ जाती है 
तेरा में मर्म लगाता  हूँ 
 सजल हवा राजल से  छितिज से 
दूर कंही में मिलाता हूँ 

तेरे अधरों पर आधारित कविता तुझे सुनाता हूँ 

में नहीं था व्याकुल , नहीं था विचलित 
फिर भी सम्मोहित हो जाता हूँ 
तेरे आलिंगन के संशय में 
सदा कंही खो जाता हूँ 

तेरे अधरों पर आधारित कविता तुझे सुनाता हूँ  

प्रखर हो रहे मन मंथन से 
माथे पर भश्म  लगाता हूँ 
अब सिमट रहे स्पर्श को तेरे 
विदा नहीं दे पाता हूँ 

तेरे अधरों पर आधारित कविता तुझे सुनाता हूँ 

@Silence Must Be heard

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