पीर मेरी ये पूछे मुझसे , आखिर में चुप क्यों रहता हूँ ,विदित है कारण विदित है फल भी
किंचित में सब क्यों सहता हूँ
तुफानो से उठते जर्रो को
क्यों आखिर बहने देता हूँ
पीर मेरी ये पूछे मुझसे , आखिर में चुप क्यों रहता हूँ ,
ज्ञान है मुझको इसका उसका
कथा कहानी और किस्सों का
ओत प्रोत है अडिग अटल है
पूछे तो सब कह देता हूँ
पीर मेरी ये पूछे मुझसे , आखिर में चुप क्यों रहता हूँ
कितना कब कैसे पाना है कन्हा किसी ने ये जाना है फिर भी मन से खुस रहता हूँ पीर मेरी ये पूछे मुझसे , आखिर में चुप क्यों रहता हूँ
प्रखर हो चले आडम्बर से केवल में इतना कहता हूँ पीर मेरी आंसू भी मेरे पीकर अमृत कर देता हूँ अमित रहेंगे निशाँ हमारे उद्घोष अभी ये कर देता हूँ पीर मेरी ये पूछे मुझसे , आखिर में चुप क्यों रहता हूँ
@ Silence Must Be Heard
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