अजब है तेरी अटखेली अजब है तेरा भोलापन,
कभी सजोया सपनो में कभी रहा व्याकुल बचपन
रेत को मुटठी में भर भर किया समन्वय नव जीवन
व्यर्थ है माया मोह का बंधन
करू समर्पित तन मन धन
रहा अगर विचलित दुनिया में
याद दिलाना अनुबंधन
में प्रखर प्रकाश हूँ
त्वरित सदा हूँ
फिर कर लूँगा अवलोकन।
@Silence Must Be Heard
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