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Tuesday, July 22, 2014

स्वयं से ही हूँ में परे !!



में स्वयं से हूँ अनभिघ्य , स्वयं से ही हूँ  परे ,
ख्वाब देखता हूँ सुनहरे, हर्ष से हरे भरे

में स्वयं से हूँ अनभिघ्य , स्वयं से ही हूँ  परे ,

समय की है गति सधी , किंचित जो न ठहरे
शहस्त्र दिशा है विदित , किन्तु रोशिनी परे !

में स्वयं से हूँ अनभिघ्य , स्वयं से ही हूँ  परे ,

कर रहा विचार मन , कर रहा हूँ हर जतन ,
निष्कर्ष दूर तक नहीं , स्पर्श से भी ये डरे !

में स्वयं से हूँ अनभिघ्य , स्वयं से ही हूँ  परे ,

विडंबना विशाल है , त्वरित ये स्वपन चाल है,
आवेग मनोभाव का , बिंदु  हर प्रखर करे

में स्वयं से हूँ अनभिघ्य , स्वयं से ही हूँ  परे । 

@ Silence must be heard !!

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